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छठ पूजा 2025: तारीख, इतिहास, महत्व, विधि, प्रसाद और मनाने का पूरा तरीका
छठ पूजा 2025 – कब है, इतिहास, महत्व, रीति-रिवाज, उत्सव और सब कुछ जो आपको जानना चाहिए
1. छठ पूजा 2025 की तारीख
छठ पूजा साल 2025 में चार दिनों तक मनाई जाएगी। यह पर्व 25 अक्टूबर से शुरू होकर 28 अक्टूबर 2025 तक चलेगा।
चारों दिनों का क्रम इस प्रकार रहेगा –
पहला दिन: नहाय-खाय – शनिवार, 25 अक्टूबर
दूसरा दिन: खरना – रविवार, 26 अक्टूबर
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य – सोमवार, 27 अक्टूबर
चौथा दिन: उषा अर्घ्य एवं पारण – मंगलवार, 28 अक्टूबर
इन चार दिनों तक व्रती सूर्य देव और छठी मैया की उपासना करते हैं और परिवार-समाज की खुशहाली की कामना करते हैं।
2. छठ पूजा का इतिहास
छठ पूजा का आरंभ प्राचीन वैदिक काल से माना जाता है। कहा जाता है कि उस समय ऋषि-मुनी सूर्य उपासना के माध्यम से अपनी आत्म-शुद्धि और दीर्घायु के लिए यह व्रत करते थे।
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम और माता सीता ने अयोध्या लौटने के बाद सूर्य को अर्घ्य देकर इस व्रत का पालन किया था। महाभारत में भी द्रौपदी द्वारा सूर्य पूजा करने का उल्लेख मिलता है, जिससे उनके परिवार में सुख-शांति आई।
इस तरह यह व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और प्राकृतिक संतुलन का प्रतीक भी है।
3. छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। सूर्य को जीवन-ऊर्जा का स्रोत माना जाता है, और छठी मैया को उनके शक्तिरूप में पूजा जाता है।
यह पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में आत्म-संयम, शुद्धता और प्रकृति के प्रति आभार कितना जरूरी है।
छठ व्रत में कठोर नियमों का पालन किया जाता है — व्रती चार दिन तक सात्विक भोजन करते हैं, कई बार निर्जला उपवास रखते हैं और पूरी श्रद्धा से अर्घ्य अर्पित करते हैं।
यह व्रत स्वास्थ्य, समृद्धि, संतान-सुख और मानसिक शांति का प्रतीक माना जाता है।
4. चार दिनों की पूजा-विधि और रिवाज
(1) नहाय-खाय
पहले दिन व्रती पवित्र नदी या तालाब में स्नान करके अपने घर और मन को शुद्ध करते हैं। इस दिन व्रती सात्विक भोजन करते हैं — आमतौर पर चने की दाल, लौकी की सब्जी और भात। इसी दिन से व्रत की शुरुआत होती है।
(2) खरना
दूसरे दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को खरना का प्रसाद बनाते हैं। इस प्रसाद में गुड़-की-खीर, रोटी और केला शामिल होता है। परिवार और पड़ोसी इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं। इस दिन से व्रती लगातार उपवास पर चले जाते हैं।
(3) संध्या अर्घ्य
तीसरे दिन शाम के समय सभी श्रद्धालु घाट या नदी किनारे एकत्रित होते हैं। व्रती सूर्य देव को डूबते सूर्य का अर्घ्य अर्पित करते हैं। घाट पर दीपदान किया जाता है, महिलाएँ पारंपरिक गीत गाती हैं और वातावरण भक्ति से भर जाता है।
(4) उषा अर्घ्य और पारण
चौथे दिन सुबह-सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह सबसे पवित्र क्षण माना जाता है क्योंकि सूर्य की पहली किरणों के साथ व्रत पूरा होता है। अर्घ्य के बाद व्रती पारण करते हैं यानी अपना उपवास तोड़ते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं।
5. छठ पूजा का सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू
छठ पूजा केवल पूजा-अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक है।
इस अवसर पर गाँव-शहरों में घाटों की सजावट होती है, लोग सामूहिक रूप से तैयारी करते हैं और हर परिवार एक-दूसरे के साथ मिलकर पर्व मनाता है।
यह पर्व महिलाओं की श्रद्धा, समर्पण और मानसिक शक्ति का भी प्रतीक है।
6. छठ पूजा से जुड़ी मान्यताएँ और तथ्य
“छठ” शब्द का अर्थ ‘छठा दिन’ होता है — यह पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को की जाती है।
इस दिन सूर्य की उपासना करने से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।
ऐसा कहा जाता है कि छठी मैया बच्चों की रक्षा करती हैं और घर में सुख-शांति लाती हैं।
इस व्रत में पूरी शुद्धता, संयम और श्रद्धा का पालन जरूरी है — व्रती के घर में बिना नमक, प्याज-लहसुन और तामसिक भोजन नहीं बनाया जाता।
7. प्रसाद और भोग की परंपरा
छठ पूजा का प्रसाद बहुत खास होता है। इसमें ठेकुआ, चावल-लड्डू, गुड़-की-खीर, केला, नारियल, सिंघाड़ा और मौसमी फल रखे जाते हैं।
प्रसाद को बाँस की टोकरी (सूप या दऊरा) में सजाया जाता है और घाट पर ले जाया जाता है। यह प्रसाद पूर्ण पवित्रता के साथ तैयार किया जाता है।
8. पर्यावरण और स्वच्छता का संदेश
छठ पूजा नदियों, सूर्य और जल-ऊर्जा की आराधना का पर्व है। इसलिए यह हमें पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देती है।
घाटों की सफाई, प्लास्टिक का कम उपयोग और स्वच्छ जल स्रोत बनाए रखना इस पर्व की आत्मा है।
आज के समय में जब प्रदूषण और जल संकट बढ़ रहा है, तब छठ पूजा हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाने की प्रेरणा देती है।
9. छठ पूजा के दौरान सावधानियाँ
व्रती को उपवास के दौरान पूरा विश्राम और संयम बनाए रखना चाहिए।
घाटों पर भीड़ के बीच सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।
भोजन और प्रसाद पूरी तरह स्वच्छ और शुद्ध होना चाहिए।
श्रद्धा के साथ नियमों का पालन करें — दिखावे से अधिक भावनात्मक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण अपनाएँ।
10. निष्कर्ष
छठ पूजा 2025 न केवल एक धार्मिक पर्व है बल्कि यह प्रकृति, परिवार और समाज के बीच एक सुंदर सेतु का काम करती है।
यह व्रत हमें सिखाता है कि जीवन में संयम, आस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान कितना जरूरी है।
सूर्य देव और छठी मैया की उपासना के माध्यम से हम अपने जीवन में ऊर्जा, प्रकाश और सकारात्मकता का स्वागत करते हैं।
इस साल जब आप छठ पूजा मनाएँ, तो सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे की भावना को भी समझें —
क्योंकि यही पर्व भारत की संस्कृति, भक्ति और एकता की सच्ची पहचान है।
जय छठी मैया! सूर्य देव की कृपा सब पर बनी रहे।
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