Today News Headlines: भारत और दुनिया की 10 बड़ी खबरें

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 आज सुबह जब घड़ी ने 6:29 बजाया, तो इज़राइल में हज़ारों लोग चुपचाप खड़े थे। तीन साल पहले ठीक इसी समय हमास के आतंकवादियों ने दक्षिणी इज़राइल पर हमला किया था। 1200 से ज्यादा लोग मारे गए थे, 251 बंधक बनाए गए थे। आज 7 अक्टूबर 2026 को वह दिन फिर याद किया जा रहा है। यह पहली सालगिरह है जब सभी बंधक घर लौट चुके हैं। कुछ जिंदा, कुछ शवों के रूप में। लेकिन दर्द अभी भी ताजा है।

दक्षिणी इज़राइल के नोवा फेस्टिवल स्थल पर, जहां तीन साल पहले युवा नाच रहे थे और अचानक गोलियां चली थीं, आज फूल और मोमबत्तियां रखी गईं। परिवार सड़कों के चौराहों पर, बम शेल्टरों के पास और अपने पुराने घरों के खंडहरों पर इकट्ठा हुए। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने माउंट हर्ज़ल पर आयोजित समारोह में कहा कि हमलावरों को जवाब दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि हमले में शामिल 6000 आतंकवादियों में से 4000 मारे जा चुके हैं। रक्षा मंत्री इज़राइल कात्ज़ ने चेतावनी दी कि हमास फिर से हमले की कोशिश कर सकता है।

गज़ा में तस्वीर दूसरी तरफ है। युद्धविराम के बावजूद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अब तक 74,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। युद्धविराम के बाद भी 1100 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। ज्यादातर लोग तंबुओं में रह रहे हैं। शहरों के बड़े हिस्से मलबे में बदल चुके हैं। आज भी वहां स्मरण सभाएं और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। एक तरफ इज़राइल में शोक है, दूसरी तरफ गज़ा में पीड़ा का सिलसिला जारी है। दोनों तरफ के परिवार तीन साल बाद भी उस सुबह को भूल नहीं पा रहे।

दुनिया भर में भी यह दिन याद किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के बोंडी बीच पर शोफार बजाया गया। न्यूयॉर्क और यूरोप के कई शहरों में स्मरण सभाएं हुईं। संयुक्त राष्ट्र में भी उच्च स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। अमेरिका के प्रतिनिधि ने कहा कि अब सभी बंधक घर लौट आए हैं और गज़ा को हमास के शासन से मुक्त करने का ढांचा तैयार है। लेकिन हकीकत यह है कि क्षेत्र में अशांति अभी थमी नहीं है। यमन के हूथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर मिसाइलें दागीं। फ्रांस में स्कूलों को लेकर हिंसक प्रदर्शन चल रहे हैं। लगभग 900 स्कूल बंद कर दिए गए।

भारत में भी आज का दिन खास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे कर रहे हैं। 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर प्रधानमंत्री तक का यह सफर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जापान की राजनीतिज्ञ सनाए ताकाइची समेत कई नेताओं ने उन्हें बधाई दी। वाराणसी में ‘सेवा संकल्प’ बाइक रैली पहुंची, जो तिरुपति से शुरू हुई थी।

राजनीति में आजकल सबसे ज्यादा चर्चा चुनाव आयोग को लेकर है। कल इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा समेत कई सांसद अकाशवाणी भवन के पास धरने पर बैठ गए। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुलिस ने सैकड़ों नेताओं को हिरासत में लिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वोट चोरी हो रही है और देश को हाईजैक कर लिया गया है। भाजपा ने इसे नाटक बताया। आज भी इस मुद्दे पर बहस जारी है। कई जगहों पर उपचुनाव भी चल रहे हैं। तीन राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में वोटिंग हो रही है। नतीजे 9 अक्टूबर को आने वाले हैं।

रक्षा क्षेत्र में भी खबरें आईं। रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदने का करीब 661 करोड़ रुपये का समझौता किया। जलडमरूमध्य में एक जहाज पर हमला हुआ, जिसमें 11 भारतीय चालक दल के सदस्य घायल हो गए। भारत ने इसकी निंदा की। लद्दाख में पहली बार बड़े पैमाने पर केसर की खेती शुरू की गई। लेह में 90,000 केसर के कॉर्म लगाए गए।

खेल की दुनिया में हरमनप्रीत कौर ने भारत की महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी से इस्तीफा दे दिया। वे एकमात्र भारतीय कप्तान हैं जिन्होंने 2025 में महिला वनडे विश्व कप जीता था। भौतिकी का नोबेल पुरस्कार फ्रांसिस हाल्जन को मिला, जिन्होंने उच्च ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज की।

अमेरिका में एक और घटना चर्चा में है। टेनेसी में मौत की सजा पाई कैदी क्रिस्ता पाइक को फांसी देने की कोशिश विफल रही। वे अब होश में हैं और बात कर रही हैं। उनके वकीलों ने और जानकारी मांगी है। हॉलीवुड में बड़ा सौदा हुआ। पैरामाउंट स्काईडांस ने वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी का अधिग्रहण पूरा कर लिया। यह मीडिया इतिहास के सबसे बड़े विलय में से एक है।

स्पेन में आवास संकट को लेकर बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। वहां स्नैप चुनाव की घोषणा भी हुई। एशियाई शेयर बाजार में थोड़ी गिरावट आई, जबकि अमेरिकी बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद स्थिर रहे।

आज की खबरें देखें तो एक बात साफ है। तीन साल पहले का एक हमला अभी भी दुनिया की राजनीति, सुरक्षा और भावनाओं को प्रभावित कर रहा है। इज़राइल और फिलिस्तीन दोनों तरफ लोग उस दिन को अलग-अलग तरीके से जी रहे हैं। भारत में घरेलू राजनीति गरमाई हुई है। चुनाव आयोग, उपचुनाव और 25 साल का सफर – ये सब आज की चर्चा के केंद्र में हैं।

दुनिया कहीं न कहीं अभी भी अशांत है। यमन से सऊदी अरब तक, फ्रांस के स्कूलों से लेकर अमेरिका की जेलों तक। लेकिन आम लोगों की जिंदगी भी चल रही है। बच्चे स्कूल जा रहे हैं, ज्यादातर जगहों पर छुट्टी नहीं है। केसर की खेती शुरू हो रही है, क्रिकेट कप्तान बदल रहे हैं, नोबेल पुरस्कार दिए जा रहे हैं।

आज की सुबह सिर्फ यादों की नहीं है। यह एक याद दिलाती है कि संघर्ष लंबे चलते हैं और उनके असर सालों तक रहते हैं। इज़राइल में मोमबत्तियां जल रही हैं, गज़ा में तंबुओं में लोग बैठे हैं, दिल्ली में सियासी नारे लग रहे हैं और दुनिया कहीं न कहीं आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। तीन साल बाद भी 7 अक्टूबर सिर्फ एक तारीख नहीं रह गया। यह एक ऐसा दिन बन गया है जो हर साल सवाल छोड़ जाता है – कितना बदला और कितना वैसा ही रह गया।

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