दिल्ली में BRICS Summit से दुनिया की नजर भारत पर, बड़े देशों के नेता जुटे; जानिए क्यों है यह बैठक खास

दिल्ली में BRICS Summit से दुनिया की नजर भारत पर, बड़े देशों के नेता जुटे; जानिए क्यों है यह बैठक खास

दिल्ली में BRICS Summit से दुनिया की नजर भारत पर, बड़े देशों के नेता जुटे; जानिए क्यों है यह बैठक खास

नई दिल्ली इन दिनों दुनिया की बड़ी कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनी हुई है। भारत की राजधानी में 12 और 13 सितंबर को BRICS Summit का आयोजन हो रहा है, जिसमें दुनिया के कई महत्वपूर्ण देशों के नेता और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत नई दिल्ली में इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जा रही है।

इस सम्मेलन को केवल एक सामान्य अंतरराष्ट्रीय बैठक के रूप में नहीं देखा जा रहा है। दुनिया इस पर इसलिए भी नजर बनाए हुए है क्योंकि इस समय वैश्विक स्तर पर युद्ध, ऊर्जा संकट, व्यापारिक तनाव और बदलते कूटनीतिक समीकरण जैसी कई बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे समय में BRICS देशों के नेताओं की बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दिल्ली में जुट रहे दुनिया के बड़े नेता

BRICS Summit में कई महत्वपूर्ण देशों के राष्ट्राध्यक्ष और वरिष्ठ प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी दिल्ली पहुंचे हैं। यह भारत की उनकी कई वर्षों बाद पहली यात्रा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर है। 

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं और दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, रक्षा और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच बैठक भी हो चुकी है, जिसमें दोनों देशों के बीच आर्थिक, ऊर्जा, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई। 

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मौजूदगी भी इस सम्मेलन को खास बनाती है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच ईरान का BRICS Summit में शामिल होना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

BRICS आखिर है क्या?

BRICS दुनिया की उभरती और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण समूह है। शुरुआत में इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। बाद में दक्षिण अफ्रीका और फिर कई अन्य देशों के जुड़ने से इसका विस्तार हुआ।

वर्तमान में BRICS में 11 सदस्य देश हैं। इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इन देशों की संयुक्त आर्थिक और जनसंख्या ताकत काफी बड़ी है। आधिकारिक भारतीय जानकारी के अनुसार ये देश दुनिया की लगभग आधी आबादी, करीब 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और लगभग 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

यही वजह है कि BRICS को अब केवल आर्थिक समूह नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में प्रभाव रखने वाले मंच के रूप में देखा जाता है।

इस बार भारत के लिए क्यों खास है सम्मेलन?

भारत 2026 में चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। इस बार भारत ने BRICS की अध्यक्षता के लिए “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” थीम रखी है।

इसका उद्देश्य आर्थिक विकास, तकनीक, सहयोग, स्थिरता और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर ध्यान देना है। भारत चाहता है कि BRICS केवल चर्चा का मंच न रहे बल्कि ऐसे व्यावहारिक फैसलों पर भी आगे बढ़े जिनसे सदस्य देशों को फायदा हो। 

दुनिया की नजर भारत-चीन बातचीत पर

इस सम्मेलन की सबसे बड़ी चर्चाओं में भारत और चीन के संबंध भी शामिल हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात को लेकर काफी उम्मीदें हैं।

दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा और व्यापार से जुड़े मुद्दों को लेकर तनाव रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात से संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों को आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है।

भारत और चीन दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। इसलिए दोनों देशों के संबंध केवल एशिया ही नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

रूस के साथ भारत की बातचीत भी अहम

BRICS Summit के दौरान भारत और रूस के संबंध भी चर्चा में हैं। रूस भारत के प्रमुख ऊर्जा साझेदारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच तेल, व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और औद्योगिक सहयोग जैसे कई क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की बैठक में दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापारिक सहयोग की समीक्षा की। दोनों देश अपने व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। 

पश्चिम एशिया का तनाव भी बड़ा मुद्दा

इस समय पश्चिम एशिया में तनाव BRICS Summit के लिए बड़ी चुनौती है। अमेरिका और इजरायल से जुड़े ईरान संघर्ष ने ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ी है। ऐसे में BRICS देशों के सामने ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखने का मुद्दा महत्वपूर्ण हो सकता है।

BRICS के अंदर भी पश्चिम एशिया के मुद्दे पर सभी देशों की स्थिति एक जैसी नहीं है। इसलिए इस विषय पर किसी साझा रुख तक पहुंचना आसान नहीं माना जा रहा है। 

डॉलर और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी चर्चा

BRICS देशों में लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को अधिक सुविधाजनक बनाने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर चर्चा होती रही है।

कई सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। सम्मेलन में व्यापार, निवेश और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रह सकते हैं।

हालांकि किसी भी बड़े बदलाव को लागू करना आसान नहीं होता। सदस्य देशों की आर्थिक नीतियां और उनके आपसी हित अलग-अलग हैं। इसलिए BRICS में सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती भी है।

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत की गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कई महत्वपूर्ण रास्तों, होटलों और सम्मेलन स्थल के आसपास विशेष व्यवस्था की है।

सम्मेलन में बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, इसलिए उनकी आवाजाही के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। दिल्ली में कई जगह ट्रैफिक व्यवस्था में भी बदलाव किए गए हैं और आम लोगों को कुछ मार्गों पर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। 

भारत की वैश्विक भूमिका हो सकती है मजबूत

BRICS Summit भारत के लिए अपनी कूटनीतिक और आर्थिक ताकत दिखाने का भी बड़ा अवसर है। भारत एक तरफ रूस और चीन जैसे देशों के साथ बातचीत कर रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और यूरोप के साथ भी अपने संबंधों को मजबूत बनाए हुए है।

ऐसे समय में भारत का संतुलित विदेश नीति वाला रुख दुनिया के सामने महत्वपूर्ण हो जाता है।

BRICS के मंच से भारत विकासशील देशों की समस्याओं को उठाने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग को भी आगे बढ़ा सकता है।

आम लोगों के लिए क्या मायने रखता है?

BRICS Summit का असर केवल नेताओं की बैठकों तक सीमित नहीं है। इस तरह के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में व्यापार, ऊर्जा, निवेश, तकनीक और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होती है।

अगर सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ता है तो भविष्य में भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार और कारोबार के अवसर पैदा हो सकते हैं। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से भी भारत को फायदा मिल सकता है।

इसके अलावा तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य और नए उद्योगों में सहयोग से युवाओं के लिए भी नए अवसर पैदा होने की संभावना रहती है।

निष्कर्ष

नई दिल्ली में हो रहा BRICS Summit इस समय दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठकों में से एक है। भारत इसकी अध्यक्षता कर रहा है और चीन, रूस, ईरान समेत कई महत्वपूर्ण देशों के नेता दिल्ली में मौजूद हैं।

इस सम्मेलन में वैश्विक व्यापार, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच इस बैठक की अहमियत और बढ़ गई है।

भारत के लिए यह सम्मेलन दुनिया के सामने अपनी कूटनीतिक क्षमता और आर्थिक महत्व को मजबूत तरीके से प्रस्तुत करने का अवसर है। आने वाले दिनों में BRICS Summit से निकलने वाले फैसले यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आने वाले वर्षों में कितना प्रभावशाली बनता है। 

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